तलाश

 

यह दुनिया बहुत बड़ी है । लेकिन इसका एक हिस्सा मैं भी हुँ । हाँ इतना बड़ा नाम न सही की हर कोई मुझे जानता हो लेकिन मेरा अस्तित्व जरूर है । क्योंकि ये मेरी दुनिया है । फिर भी इस दुनिया से ही अंजान हूँ मैं , नही पता क्या होने वाला है क्या होजाएगा । ” आज है कोई इधर , न जाने कल किधर खो जाएगा ”

खैर जबसे पैदा हुआ तबसे कुछ न कुछ पाने को भटक रहा हुँ इसीलिए शायद आज लिख रहा हूँ ताकी आपको क्या करना है क्या नही ये सब समझा सकूँ ।

शुरू से याद करू तो …

  • स्कूल में लगा कि अच्छे चरित्र को पाना मेरी मंजिल है , बड़ो का कहना मानना मेरा परम धर्म है , सबसे प्यार से बात करना ही मेरी पहचान है , सबके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही मूझको मुझसा बना कर रखेगा । यही सब धर्म है यही सब है जो हमें इंसान बनाता है ।
  • लेकिन जब मैं बोर्ड की कक्षा में पहुंचा तो मुझे सिखाया गया कि सबके साथ चलोगे तोह जीवन में सफल नही हो पाओगे , तुमको दौड़ना है सबसे तेज़ दौड़ना है , और इस रफ्तार से आगे जाना है कि कोई तुम्हारे साथ कदम न मिला पाए , तुमको किसी की परवाह नही करनी तुमको सिर्फ अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करना है , हर उन इच्छाओं को छोड़ देना है तुमको जिससे तुम्हे लगे कि तुम अच्छे परिणाम परीक्षा में नही ला पाओगे । हर वो बात जो स्कूल में सीखी अस्तित्व उनका  खत्म होता प्रतीत हुआ ।
  • जब कॉलेज पहुंचा तो जाना कि एक अच्छी नौकरी पाना ही उद्देश्य है हमारा , या फिर एक ऐसी उपादि जिससे समाज में सब मुझको सम्मान भरी नजरों से देखें ।। वो सब बातें वो परीक्षा की तैयारी सब व्यर्थ ही लगने लगा , उस समय मैंने जाना कि ज्ञान के लिए मैंने कुछ किया ही नही , मैं तो सिर्फ अछि नौकरी के लिए सब कर रहा हूँ ।
  • जब नौकरी लगा तो जाना मैं तो सिर्फ चंद पैसो के लिए पूरा समय लगा दिया ।

 

बहुत दुख हुआ आज ये सब लिखकर क्योंकि लिखते हुए ही तो मुझे ये सब पता चल पाया है , लेकिन दुख से ज्यादा मुझे सकून मिला है , सकून इस बात का की मैं दिल की बात दिल से निकाल पाया हूँ , किसीको सुना पाया हूँ , शब्दों में जज़्बात अपने कैद कर पाया हूँ ।। शायद मुझको समझाने वाला कोई था नही , तो कुछ जो समझ पाया हूँ तुमको समझाने की कोशिश करता हूँ ।

 

ये जीवन , ये दुनिया बहुत प्यारी , खूबसूरत और रोमांचक है और इसे ही और भी ज्यादा खूबसूरत बनाने के लिए हमको यहाँ भेजा गया है , किसने भेजा ये आज तक कोई नही जानपाया और जानकर शायद कुछ हासिल भी नही होगा । इसीलिए ऐसे सवालों को सोचकर अपना समय व्यर्थ मत करना । हम सबके पास एक सीमित समय होता है , लेकिन जितना भी होता है कम ही होता है । यहाँ बहुत कुछ है सिखने को , महसूस करने को ,  इसीलिए तुम्हारे पास थोड़ा सा भी नही है बर्बाद करने को । तुम अपने जीवन के साथ कुछ न कुछ तो कर ही लोगों , कुछ न कुछ तो कमा ही लोगे । लेकिन तुम हर रोज़ कुछ नया करना कुछ नया सीखना और कभी किसी काम को लेकर मन में दुविधा हो तो ये याद रखना की कुछ न करके पछताने से अच्छा है कुछ करके पछताना , क्योंकि कुछ करके अगर कुछ न भी मिला तो तज़ुर्बा मिलेगा। हर चीज़ का तज़ुर्बा लेना , लेकिन किसी भी चीज़ की आदत मत डालना । गलतियों से सीखना , उन्हें दुबारा होने से रोकना लेकिन कभी गलतियां करने से डरना मत क्योंकि गलतियां वही करता है जो कुछ करता है । अपनी गलतियों की जिम्मेवारी लेना उन्हें सुधारना , दूसरे की गलतियों को माफ कर देना उन्हें गलती सुधारने का मौका देना वही मौका जो तुम खुदके लिए सोचते हो कि मिलना चाहिए । सबपर उतनी ही नरमी बर्तना जितनी खुदपे बरतते हो । इस दुनिया मे प्यार की बहुत कमी है तो याद रखना मांगने में जिझकना मत , और देने में कतराना मत । जिंदगी बहुत छोटी है शर्म के लिए संकोच के लिए तो आये न आये खुलके नाचना , गला फाड़ के गाना , मन भरके खाना । सिर्फ अपने शरीर को ही बढ़ने देना मन को नहीं , जिस दिन ये बचपना गया समझ लेना जिंदगी गयी । भविष्य के बारे में सोचना , लेकिन चिंता मत करना । बीते दिनों को याद करना लेकिन उसमें खो मत जाना । जिंदगी में कुछ अच्छे दिन आएंगे , कुछ बुरे दिन आएंगे । अच्छे दिनों में घमंड मत करना , बुरे दिनों में हताश मत होना । सफलता का सारा श्रेय खुदको मत देना , और असफलता का सारा जिम्मा दुसरो के सिर मत छोड़ना । आगे बढ़ते जाना और ये याद रखना की तुम्हे यहाँ खुशियां बांटने और इस दुनिया को और भी खूबसूरत बनाने के लिए भेज गया है । तो हस्ते रहना मुस्कुराते रहना ।।

कायरता !!

साहसी नहीं हूँ मैं बहुत बड़ा कायर हुँ । शायद आप सब सोचेंगे की यह क्या बात हुई अपने बारे में पहली बार बता रहा है और शुरुआत कर रहा है अपने आप को कायर बताने से । तो आप कुछ गलत नही सोच रहे क्योंकि मैं हमेशा बचता आया हूँ , डरता आया हुँ की लोग क्या कहेंगे – क्या सोचेंगे भले ही मैं खुदको कितना मर्द बता लू लेकिन अंदर ही अंदर एक डर हमेशा रहा है मुझमें कि कहीं मैं इस दुनिया की भीड़ में कहीं खो ना जाऊँ । कहीं लोग मेरी सादगी मेरे प्यार को भूल न जाय । कहीं मैं उनको खो ना दु जिनको मैंने खुद से ज्यादा समय दिया लेकिन सच बताऊ इस 23 साल में से 13 साल सिर्फ मैंने डर के गुजार दिए ।

डर अध्यापक की मार का 

डर पिता की फटकार का

डर दोस्तों के व्यवहार का

डर अपने संस्कार का

डरता रहा धर्म से , डरता रहा भ्रम से , सबने कहा संभाल के चलो तो डरता रहा हर कदम से । तुम ही बताओ यह धर्म यह संस्कार किस नाम के जो मझे मुझसे दूर करते रहे । जिन्होंने मुझे मुझसे मिलने की जगह मुझसे खुदको दूर करने का राह दिखाई । 

हाँ!!  मैं दिल से नहीं मानता इन सबको लेकिन फिर भी डर के आज भी झुका देता हूँ मस्तक मेरा । 

क्या इतना काफी नही है । 

अक्सर मैं ये बात खुदसे पूछता हूँ कि क्या इतना काफी नहीं है जो तुम अब सब जानकर भी डरे जा रहे हो । तोह कोई आवाज़ मुझ तक नही पहुँचती । पहुँचता है तो एक डर की कहीं कुछ आगे गलत ना होजाए , कहीं कोई अनर्थ अब इस समय जब मेरे शरीर में जान नही है कुछ सहने कुछ कहने की ना होजाए ।

हाँ !! मैं कायर हुँ क्योंकि मैं सबकुछ जानकर भी कुछ नही कर सकता । इस दुनिया के लोगों की तुच्छ सोच बदलने की हिम्मत मुझमें नहीं है , तोह हाँ ! मैं सिर्फ और सिर्फ कायर कहलाने के लायक हुँ । इसमें मुझे बोलते हुए कोई शर्म नही आती । जब तक इंसान खुदको यूँही खोखले विचारो से भरता रहेगा वो कभी साहसी नहीं बन सकता । 

जरूरत है हमको अपनी कायरता को पहचानने का ।

जरूरत है अपनी कायरता का साहस से सामना करने का ।

जरूरत है हमको जब कुछ गलत होता दिखे तो उसका विरोध करने का ।

और जब तक हम ये सब नही कर सकते , तब तक आपको और मुझे खुदको साहसी बोलने का कोई हक नही ।।

तब तक आप और मैं सिर्फ एक कायर है ।